चमोली में पर्यटन से रोजगार की राह दिखाते युवा

 चमोली में पर्यटन से रोजगार की राह दिखाते युवा
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गोपेश्वर : उत्तराखंड में पर्यटन सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला सेक्टर है। कोरोना की वजह से पर्यटन व्यवसाय सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। पर्यटन व्यवसाय से जुड़े युवाओं को उम्मीद है कि आने वाले विंटर सीजन तक एक बार फिर से पर्यटन व्यवसाय पटरी पर लौट आयेगा। चमोली जनपद पर्यटन की दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। धार्मिक पर्यटन से लेकर साहसिक पर्यटन के लिए हर साल लाखों पर्यटक यहाँ पहुंचते है। पर्यटन दिवस पर बात चमोली के उन युवाओं की जिन्होंने चमोली में पर्यटन को नयी पहचान दिलाई और रोजगार के अवसर भी सृजित किये।

 

विमल मलासी- चमोली के श्रीकोट (मायापुर) निवासी विमल मलासी चेज हिमालय के सीईओ हैं। ये विगत 10 सालों से ट्रैकिंग के जरिए पर्यटकों को चमोली ही नहीं बल्कि उत्तराखंड के विभिन्न पर्यटक स्थलों का भ्रमण करा रहे हैं। चेज हिमालय के बैनर तले इन्होंने प्रशिक्षु आईएएस और आईएफएस अधिकारियों के दल को भी चमोली के पर्यटन स्थलों की सैर कराई। इस साल वे एयर फोर्स के प्रशिक्षु ऑफिसरो को  पंचकेदार ट्रैक करवायेंगे।

राहुल मेहता- बैकुंठ धाम बद्रीनाथ और पांडुकेशर के निवासी राहुल मेहता माउंटेन ट्रैक्स के सीईओ हैं। चमोली के पहाड़ियों में घूमने के शौकीन हैं। ये भी ट्रैकिंग के जरिए पर्यटकों को जनपद चमोली के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित बुग्यालो, तालों और पहाडियों की सैर कराते हैं। पहाड़ की हांफने वाली चढाई ये मिनटों में तय कर जातें हैं। राहुल नें बेहद दुर्गम और दुरूह हिडन पास गुप्तखाल को दो बार फतह किया है जबकि माणा पास तक वे साइकिल से जा चुके हैं। इस सर्दियों में वे बद्रीनाथ कालिंदी खाल ट्रैक करनें वाले है।

हीरा सिंह गढ़वाली-सीमांत देवाल ब्लाॅक के वाण गांव निवासी हीरा सिंह गढ़वाली गढभूमि एडवेंचर के सीईओ हैं। हीरा विगत 10 सालों से पर्यटकों को रूपकुण्ड, वेदनी ऑली बुग्याल, ब्रहमताल, भेंकल ताल, मोनाल ट्रैक, हिलकोट ट्रैक, बगजी नागडी बुग्याल ट्रैक सहित विभिन्न ट्रैकिंग रूटों पर पर्यटकों को ट्रैकिंग कराते हैं। नंदा की वार्षिक लोकजात यात्रा और राजजात यात्रा में भी वे पर्यटकों को धार्मिक पर्यटन कराते हैं।

सोहन बिष्ट-विगत 18 सालों से स्नोलाइन ट्रैकर्स के जरिए चमोली में पर्यटन को नयी दिशा दे रहे परसारी गांव जोशीमठ के सोहन बिष्ट नें चमोली के हर पर्यटक स्थल की खाक छानी और पर्यटकों को वहां तक पहुंचाया। फूलों की घाटी से लेकर संतोपथ, द्रोणागिरी से लेकर नीती तक हर जगह पर्यटन को बढ़ावा दिलाया। यही नहीं सोहन बिष्ट नें अपनी बेहतरीन फोटोग्राफी से पर्यटन स्थलों को नयी पहचान भी दिलाई।

मनीष नेगी-घाट ब्लाॅक के रामणी गांव निवासी मनीष नेगी देवभूमि एडवेंचर एंड ट्रैकर्स के सीईओ हैं वे विगत 10 सालों से पहाड़ की डांडी कांठी और बुग्यालों- तालों में पर्यटकों को घुमा रहें हैं और रोजगार सृजन की उम्मीदों को पंख लगा रहें हैं। सप्तकुंड की हांफने वाली चढाई हो या फिर रूद्रनाथ के मखमली घास के बुग्याल इन्हें हर चुनौती का सामना करना पसंद है।

 

इन स्थानों की कराते हैं पर्यटकों को सैर

ये युवा रूपकुण्ड, बेदनी-ऑली बुग्याल, ब्रहमताल, भेंकलताल, बगजी-नागडी बुग्याल ट्रैक, बंडीधूरा बुग्याल ट्रैक, नंदीकुड, बंशीनारायण बुग्याल, फूलों की घाटी, कागभूषंडी झील, गोमुख-तपोवन,  चिनाप घाटी, सप्तकुंड, रूद्रनाथ, चोपता, ऊर्गम, औली, नीती घाटी, मोनाल टाॅप, हिलकोट ट्रैक, पंचकेदार, नंदीकुड, गुप्तखाल, कालिंदी बुग्याल, देवरियाताल के साथ साथ हरकीदून, दयारा बुग्याल सहित उत्तराखंड के विभिन्न स्थानों में।

हिमालय और बुग्यालों के संरक्षण और संवर्धन का संदेश 

ये युवा पोस्टरों के जरिए लोगों को हिमालय बुग्याल संरक्षण और संवर्धन का संदेश दे रहें हैं। बुग्याल बचाओ, बुग्याल में मानवीय हस्तक्षेप कम करनें, बुग्याल को पालीथीन मुक्त करनें, बुग्याल को आग से बचाने, बहुमूल्य जडी बूटियों के संरक्षण और संवर्धन, सहित विभिन्न स्लोगनो को लिखे हुये पोस्टरों के जरिए पर्यटकों और लोगों को हिमालय बचानें का संदेश देते हैं। हर कोई इन युवाओं की इस अनूठी पहल की भूरी भूरी प्रशंसा कर रहे हैं।

 

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