शीतकाल के लिये विश्व धरोहर फूलों की घाटी सैलानियों के लिये हुई बंद

 शीतकाल के लिये विश्व धरोहर फूलों की घाटी सैलानियों के लिये हुई बंद
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चमोली : जिले के नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी रविवार को शीतकाल के लिये सैलानियों की आवाजाही के लिये बंद कर दी गई है। इस वर्ष 21 जुलाई से 31 अक्तूबर तक संचालित घाटी की यात्रा के दौरान यहां 9504 देशी और विदेशी सैलानियों नेघाटी के दीदार किये।

गौरतलब है कि सामान्यतः फूलों की घाटी प्रतिवर्ष जून माह में सैलानियों के लिये खोल दी जाती है। लेकिन बीते दो वर्षों से कोरोना के चलते घाटी को जून माह के बाद खोला गया है। इस वर्ष पार्क प्रशासन की ओर से घाटी को 21 जुलाई को सैलानियों के दीदार के लिये खोला गया था। यहां तीन माह तक संचालित की गई यात्रा के दौरान 15 विदेशी सैलानियों के साथ ही कुल 9504 देसी व विदेशी सैलानी घाटी के दीदार के लिये पहुंचे। घाटी के दीदार को पहुंचे पर्यटकों से नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान को 13 लाख 93 हजार 575 रुपये की आय प्राप्त हुई है। नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के वन क्षेत्राधिकारी बृजमोहन भारती ने कहा कि कोरोना के चलते बीते दो वर्षों से यहां पहुंचने वाले सैलानियों की संख्या में कमी आई है। हालांकि इस वर्ष बीते दो वर्षों की अपेक्षा सैनालियों की संख्या में वृद्धि हुई है। बताया कि घाटी रविवार को आम लोगों की आवजाही के लिये बंद कर दी गई है।

 

कहाँ है विश्व धरोहर फूलां की घाटी

चमोली जिले में समुद्र तल से 13 हजार फीट की ऊंचाई पर विश्व धरोहरों में शामिल फूलों की घाटी स्थित है। 6 नवंबर 1982 में क्षेत्र को सरकार की ओर से राष्ट्रीय पार्क घोषित किया गया। जिसके बाद इसकी जैव विविधता के चलते वर्ष 2004 में यूनेस्को की ओर से इसे विश्व धरोहरों में शामिल किया गया। यहां वनस्पति विज्ञानियों के अनुसार पाँच सौ से अधिक प्रजातियों के हिमलायी फूल पाये जाते हैं।

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