शीतकाल के लिये भू-बैंकुठ बदरीनाथ धाम के कपाट हुए बंद

 शीतकाल के लिये भू-बैंकुठ बदरीनाथ धाम के कपाट हुए बंद
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बदीरीनाथ : बदरीनाथ धाम के कपाट शनिवार को परंपराओं के साथ शीतकाल के लिये बंद कर दिये गये हैं। धाम के कपाट बंद होने के साथ ही इस वर्ष की चार धाम यात्रा भी समाप्त हो गई है। कपाट बंद होने के मौके पर धाम में शनिवार को 4 हजार 366 तीर्थयात्रियां ने भगवान नारायण के दर्शन किये।
शनिवार को ब्रह्म मुहूर्त में बदरीनाथ मंदिर के कपाट खुलते ही मुख्य पुजारी रावल ईश्वर प्रसाद नम्बूदरी मंदिर के गर्भगृह भगवान नारायण की अभिषेक पूजाओं और पुष्प श्रृंगार की प्रक्रियाएं संपन्न की। इस दौरान रावल ईश्वर प्रसाद नम्बूदरी ने महिला वेष में माता लक्ष्मी की सखी के रुप में गर्भ में प्रवेश किया। जिसके बाद यहां माता लक्ष्मी को भगवान नारायण के सांनिध्य में विराजमान कर पूजा-अर्चना की गई। यहां पौरणिक परम्पराओं के अनुरुप पूरे दिन मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खुले रहे। शाम 4 बजे मंदिर के कपाट बंद होने की प्रक्रियांएं शुरु की गई। मुख्य पुजारी रावल ने मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश कर माणा गांव की सुहागिन महिलाओं द्वारा ऊन से बनी घृत कम्बल भगवान नारायण को ओढाया। यहां करीब 1 घंटे तक चली विशेष पूजाओं के पश्चात निर्धारत 6 बजकर 45 मिनट पर मंदिर के कपाट शीतकाल के लिये बंद कर दिये गये। मंदिर के कपाट बंद होने के साथ ही उद्धव जी और कुबेर जी व आदि गुरु शंकराचार्य गद्दी को श्रद्धालुओं के साथ मंदिर परिसर से बाहर लाया गया। इस दौरान देवस्थानम बोर्ड के अपर कार्याधिकारी बीडी सिंह, धर्माधिकारी भुवन उनियाल, नगर पंचायत अधिशासी अधिकारी सुनील पुरोहित, सहित मंदिर समिति के अधिकारी-कर्मचारी, हक-हकूकधारी आदि मौजूद थे।

 

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