माउंट त्रिशूल अभियान : 4 लापता पर्वतारोहियों के मिले शव

 माउंट त्रिशूल अभियान : 4 लापता पर्वतारोहियों के मिले शव
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चमोली : त्रिशूल पर्वत पर पर्वतारोहण पर गए नौ सेना के 6 जवान हिमस्खलन की चपेट में आ गए थे। जिसके बाद रेस्क़यु अभियान चलाया गया। जिसमे आर्मी के हेलीकॉप्टर निम के प्रधानाचार्य अमित बिष्ट के नेतृत्व में सर्च बचाव में जुटे रहे इस दौरान कई बार बार खराब मौसम रेस्क़यु में बाधा बना। लेकिन शनिवार देर शाम तक 4 पर्वतारोहियो के शव बरामद हुए।

दो पर्वतारोहियों की तलाश जारी

नेहरू पर्वतारोहण संस्थाननेहरू पर्वतारोहण संस्थान के कर्नल अमित बिष्ट ने बताया कि पांच लापता नौसेना पर्वतारोहियों में से चार – लेफ्टिनेंट कमांडर रजनीकांत यादव, लेफ्टिनेंट कमांडर योगेश तिवारी, लेफ्टिनेंट कमांडर अनंत कुकरेती, हरिओम एमसीपीओ II के पार्थिव शरीर आज त्रिशूल पर्वत चमोली से बरामद किए गए। पांचवें नौसैनिक पर्वतारोही और एक शेरपा का पता लगाने के प्रयास जारी हैमाउंट त्रिशूल अभियान में लापता 4 पर्वतारोहियों के मिले शव बरामद किए हैं।

त्रिशूल पर्वत अभियान पर गयी 13 साल की काम्या

चमोली: माउंट त्रिशूल की फतह के लिए गई मुंबई की 13 वर्षीय काम्या सुरक्षित है। ‌एवलांच आने के बाद सुरक्षा बलों ने काम्या व नौ सेना के जवानों को सुरक्षित बचा लिया गया। 01 अक्टूबर को सुबह पांच बजे बर्फीला तूफान आया तो नौ सेना के कैंप में अफरा-तफरी मच गई। कई जवान हताहत हुए। 13 वर्षीय काम्या भी त्रिशूल चोटी से महज 500 मीटर की दूरी पर बैस कैंप में थी। शनिवार को देर शाम सुतोल गांव पहुंचे दो पोर्टरों ने त्रिशूल पर्वत पर एवलांच आने के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि नौ सेना के अन्य जवानों को बचा लिया गया है। उनके साथ काम्या भी है। वह सुरक्षित है। उसके पिता नौ सेना के कमांडर कार्तिकेयन सुंदरम भी त्रिशूल चोटी की तलहटी में बने बैस कैंप में सुरक्षित हैं। बैस कैंप का यह स्थान होमकुंड है। सेना की विशेष टीम त्रिशूल पर्वत पर रेस्क्यू के लिए पहुंच गई है। रविवार को रेस्क्यू दल के लोग एवलांच में अपनी जान गंवा बैठे जवानों के शवों को लेकर सेना के हेलीकॉप्टर से जोशीमठ पहुंच सकते हैं। सुतोल गांव से सेना का दल भी ट्रेकिंग कर आधे रास्ते से चंदनियाघाट पहुंच गया है। चमोली। माउंट त्रिशूल की फतह के लिए गई मुंबई की 13 वर्षीय काम्या सुरक्षित है। ‌एवलांच आने के बाद सुरक्षा बलों ने काम्या व नौ सेना के जवानों को सुरक्षित बचा लिया गया। 01 अक्टूबर को सुबह पांच बजे बर्फीला तूफान आया तो नौ सेना के कैंप में अफरा-तफरी मच गई। कई जवान हताहत हुए। 13 वर्षीय काम्या भी त्रिशूल चोटी से महज 500 मीटर की दूरी पर बैस कैंप में थी। शनिवार को देर शाम सुतोल गांव पहुंचे दो पोर्टरों ने त्रिशूल पर्वत पर एवलांच आने के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि नौ सेना के अन्य जवानों को बचा लिया गया है। उनके साथ काम्या भी है। वह सुरक्षित है। उसके पिता नौ सेना के कमांडर कार्तिकेयन सुंदरम भी त्रिशूल चोटी की तलहटी में बने बैस कैंप में सुरक्षित हैं। बैस कैंप का यह स्थान होमकुंड है। सेना की विशेष टीम त्रिशूल पर्वत पर रेस्क्यू के लिए पहुंच गई है। रविवार को रेस्क्यू दल के लोग एवलांच में अपनी जान गंवा बैठे जवानों के शवों को लेकर सेना के हेलीकॉप्टर से जोशीमठ पहुंच सकते हैं। सुतोल गांव से सेना का दल भी ट्रेकिंग कर आधे रास्ते से चंदनियाघाट पहुंच गया है।

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