असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में एपीआई का विरोध शुरु, इंद्रेश मैखुरी ने उठाई बाध्यता खत्म करने की मांग

 असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में एपीआई का विरोध शुरु, इंद्रेश मैखुरी ने उठाई बाध्यता खत्म करने की मांग
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चमोली : उत्तराखंड के विभिन्न राजकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 455 पदों पर नियुक्ति के लिए उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की ओर से जारी विज्ञप्ति में एपीआई (शैक्षणिक प्रदर्शन संकेतक) के आधार पर किये जाने की शर्त रखी गई। जिसका भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने वाले अभ्यर्थियों ने विरोध किया है। इस संबंध में भाकपा माले के गढ़वाल सचिव इंद्रेश मैखुरी ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेज कर इस बाध्यता को समाप्त करने की मांग की है।
भाकपा माले के गढ़वाल सचिव का कहना है कि लंबे समय बाद उत्तराखंड में उच्च शिक्षा शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। इस भर्ती प्रक्रिया से अभ्यर्थियों को खुशी होनी चाहिए थी लेकिन भर्ती प्रक्रिया के लिए जिस तरह की शर्त रखी गई है। उससे अभ्यर्थियों में भारी निराशा के साथ ही उन्हें प्रतियोगिता में शामिल होने से वंचित करने के लिए एक साजिश करार दिया है। इस भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों की छंटनी एपीआई (शैक्षणिक प्रदर्शन संकेतक) स्कोर के आधार पर की जाएगी। उनका कहना है कि पूरे देश में जहां भी असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर नियुक्ति हो रही है, वहां लिखित परीक्षा और साक्षात्कार चयन का आधार है। 2019 में छत्तीसगढ़, 2020 में राजस्थान और उत्तर प्रदेश में सीधी भर्ती, लिखित परीक्षा के आधार पर हुई हैं। उत्तराखंड में 2017 में हुई असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती स्क्रीनिंग और साक्षात्कार के जरिये हुए तो अब की बार एपीआई और साक्षात्कार की प्रक्रिया अपनाए जाने का कारण समझ से परे है।
उन्होंने कहा कि भारत के राजपत्र में प्रकाशित, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की 18 जुलाई 2018 की अधिसूचना में भी असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए एपीआई स्कोर की बाध्यता नहीं है तो फिर उत्तराखंड सरकार और उत्तराखंड लोक सेवा आयोग का जोर अचानक से एपीआई पर क्यूं बढ़ गया है। यह बात किसी को हजम नहीं हो रही है। उनका कहना है कि 2016 के बाद उत्तराखंड में कोई राज्य पात्रता परीक्षा नहीं हुई है. उच्च शिक्षा में इस परीक्षा में बैठने के पात्र अभ्यर्थी, लगातार इस परीक्षा को कराये जाने की मांग करते रहे, उच्च शिक्षा मंत्री भी राज्य पात्रता परीक्षा कराये जाने का बयान देते रहे, लेकिन यह परीक्षा नहीं कराई गयी।
उन्होंने मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री और सचिव लोक सेवा आयोग से मांग की है कि असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के एपीआई की बाध्यता को समाप्त किया जाये और यह नियुक्ति उत्तराखंड की ओर से 2017 में अपनाई गयी नियुक्ति प्रक्रिया अथवा देश के अन्य राज्यों की ओर से अपनाई गयी नियुक्ति प्रक्रिया के तरीके की जाये।

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