पौराणिक वासुकी नाग मंदिर  के विकास को सरकारी मदद की दरकार

 पौराणिक वासुकी नाग मंदिर  के विकास को सरकारी मदद की दरकार
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प्राकृतिक सौंदर्य और आस्था का केंद्र है पौराणिक वासुकी नाग मंदिर
गोपेश्वर : पर्यटन और तीर्थाटन के बूते भले ही सरकारें स्वरोजगार में वृद्धि कर स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि की बात कह रही हैं। लेकिन राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में स्थिति पर्यटन और तीर्थाटन की संभावना समेटे स्थलों को लेकर जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। चमोली जिले में ऐसे ही दशोली ब्लॉक में चमोली और रुद्रप्रयाग की सीमा क्षेत्र में स्थित है पौराणिक वासुकी नाग मंदिर! लेकिन मंदिर को लेकर पर्यटन विभाग, वन विभाग और जिला प्रशासन की लापरवाही के चलते मंदिर की जानकारी वर्तमान तक सीमित लोगों को ही है। ऐसे में मंदिरों के विकास और प्रचार-प्रसार का अंदाजा लगाया जा सकता है।
वासुकीनाग मंदिर जिले के दशोली ब्लॉक की मंडल घाटी में केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के संरक्षित क्षेत्र में स्थित है। पौराणिक नाग देवता का मंदिर जहां क्षेत्र के मंडल, खल्ला, कोटशीर, दोगड़ी, कांडई कुनकुली, देवलधार, अनसूया सहित दर्जनभर गांवों की आस्था का केंद्र है। वहीं मध्य हिमालयी क्षेत्र में होने से लिये यह हिमालयी जड़ी-बूटियों, पक्षियों और वन्य जीवों के अद्भुत संसार को समेटे हुए है। जिसके चलते आस्थावान लोगों के साथ ही यह स्थान वनस्पति विज्ञानियों के लिये भी प्रकृति के उपहार से कम नहीं है। लेकिन मंदिर के बारे में वर्तमान तक पर्यटन विभाग के पास जानकारी न होने से यह क्षेत्र पर्यटक और तीर्थयात्रियों की पहुंच से दूर है। मंदिर के संरक्षित वन क्षेत्र में होने से यहां यात्री सुविधाओं के विकास का जिम्मा केदरानाथ वन्य जीव प्रभाग का है। लेकिन वन विभाग की ओर से यहां यात्री सुविधाओं के विकास के लिये कोई खास योजना तैयार नहीं की गई है। जबकि विभाग की ओर से यदि क्षेत्र का योजनाबद्ध तरीके से विकास किया जाता है तो जहां मंदिर के देश और दुनिया में पहचान मिल सकेगी। वहीं स्वरोजगार सृजन के साथ ही विभाग को राजस्व की प्राप्ति भी हो सकेगी। मंदिर के पास मौजूद ताल भी मलबे से पटा हुआ है। ये ताल जहां एक ओर मंदिर के सौंदर्य को बढता है, वहीं वन्य जीवों को पानी की आपूर्ति भी करता है।

क्या कहते हैं स्थानीय ग्रामीण—
स्थानीय निवासी महानंद बिष्ट, संदीप तिवारी और भगत बिष्ट का कहना है कि वासुकीनाग मंदिर सिद्धपीठ है। जहां नाग देवता की पूजा अर्चना की जाती है। मंदिर के सरंक्षण और प्रचार-प्रसार व यात्रा मार्ग पर यात्री सुविधाओं के विकास की मांग की गई। लेकिन वर्तमान तक कोई सकारात्मक पहल नहीं हो सकी है।

कैसे पहुंचे वासुकी नाग मंदिर—-
गोपेश्वर-ऊखीमठ मोटर मार्ग पर गोपेश्वर से 30 किमी की दूरी पर स्थित कांचुला खर्क नामक स्थान तक वाहन से पहुंचकर। यहां से करीब 3 किमी की पैदल दूरी तय कर वासुकी नाग मंदिर पहुंचा जा सकता है।

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