गोपेश्वरवासियों ने विकास प्राधिकरण के नियमों में शिथिलता की मांग उठाई

 गोपेश्वरवासियों ने विकास प्राधिकरण के नियमों में शिथिलता की मांग उठाई
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गोपेश्वर: गोपेश्वर के नगरवासियों ने मुख्यमंत्री से नगर क्षेत्र में विकास प्राधिकरण के नियमों में शिथिलता बरते जाने की मांग उठाई है। नगरवासियों ने मांग को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर कार्रवाई की गुहार लगाई है। कहा गया किया विकास प्राधिकरण के मानकों के चलते नगर में भवन निर्माण के अनुमति की लागत बढ गई है। जिससे स्थानीय लोगों को खासा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बता दें चमोली में वर्ष 2016 तक चमोली-गोपेश्वर, बदरीनाथ, औली और गौचर विनियमित क्षेत्र में शामिल किये गये थे। वर्ष 2017 में जिला प्राधिकरण का गठन कर सभी स्थानों पर भवन निर्माण के लिये नक्शा पास करने की प्रक्रिया शुरु कर दी गई। जिसका गठन के बाद से ही पहाड़ी क्षेत्रों में विरोध हो रहा था। नगर पालिका के नामित सदस्य हरि प्रसाद ममगांई, भूपेंद्र सिंह, तेजवीर का कहना है कि प्राधिकरण की नियमों से पहाड़ी क्षेत्रों में भवन निर्माण कठिन हो गया है। वहीं विभागीय प्रक्रियाओं में हो रही देरी से लोगों को दिक्कतों का सामना करने के साथ ही सरकार की ओर से तय की गई फीस के चलते खासा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जिसे देखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने विकास प्राधिकरण पर रोक लगाने के आदेश दिय। लेकिन आवास विभाग की ओर से जारी आदेश में वर्ष 2016 से पूर्व बने विनियमित क्षेत्रों में प्राधिकरण के यथावत रहने की बात कही गई है। जिसके चलते जिले के बदरीनाथ, औली, चमोली-गोपेश्वर और गौचर में वर्तमान तक स्थिति यथावत बनी हुई है। जिसे देखते हुए नगरवासियों की ओर नियमों शिथिलता की मांग की जा रही है।

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