पढ़ने-लिखने के लिये बच्चों की जान जोखिम में

 पढ़ने-लिखने के लिये बच्चों की जान जोखिम में
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चमोली : उत्तराखण्ड राज्य निर्माण के बाद से बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिये सरकारों की ओर तमाम सरकारी प्रयास किये जा रहे हैं। लेकिन प्रयासों की बानगी कार्यक्रमों के आयोजन से आगे नहीं बढ़ पा रही है। ऐसे ही इन दिनों चमोली के बण्ड क्षेत्र के गुनियाला गांव में प्रशासन और आपदा प्रबंध की सुस्त कार्य प्रणाली के चलते गांव के बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ने-लिखने को स्कूल पहुंच रहे हैं।

बता दें कि दशोली ब्लॉक के मठ-गुनियाला गांव में 1 अगस्त को हुई मूसलाधार बारिश से यहां गांव को यातयात सुविधा उपलब्ध कराने वाली सड़क और पैदल रास्ते क्षतिग्रस्त हो गये थे। जिसके बाद यहां प्रशासन की टीम ने संयुक्त मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में आपदा प्रभावित क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कर विभागीय कर्मचारियों को आवश्यक कार्रवाई कर प्रभावितों को राहत पहुंचाने के निर्देश दिये थे। लेकिन कर्मचारियों की लापरवाही के चलते वर्तमान तक यहां पैदल मार्ग और सड़क सुधारीकरण के प्रस्ताव भी आपदा प्रबंधन कार्यालय को नहीं मिल सके हैं। जिसके चलते यहां ग्रामीण और स्कूली बच्चे जान-जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं। मठ झडेता ग्राम प्रधान सजंय राणा, बेमरु ग्राम प्रधान पंकज कुमार, इंदर सिंह, जगदीश सेमवाल, प्रेम सिंह, सुमन राणा, बंसी प्रसाद, मनोज सिंह, महेंद्र सिंह, बलबीर सिंह, कुलदीप नेगी, अनिल सिंह और रविंद्र नेगी का कहना है कि गांव के निचले हिस्से में टीएचडीसी की ओर से बनी आधी-अधूरी सड़क के चलते गांव के पैदल मार्ग, नाप भूमि और भवन खतरे की जद में हैं। कई बार टीएचडीसी के अधिकारियों और जिला प्रशासन से यहां भूस्खलन के सुधारीकरण की मांग की गई लेकिन वर्तमान तक स्थिति जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि शीघ्र मार्गों का सुधारीकरण न किये जाने पर यहां बड़ी दुर्घटना की संभावना बनी हुई है।विभागीय कर्मचारियों की लापरवाही का आलम यह है आपदा के दो माह बाद भी सुधारीकरण को लेकर प्रस्ताव आपदा प्रबंधन विभाग को नहीं भेजा जा सका है।विभागीय कर्मचारियों की लापरवाही का आलम यह है आपदा के दो माह बाद भी सुधारीकरण को लेकर प्रस्ताव आपदा प्रबंधन विभाग को नहीं भेजा जा सका है।

मठ-गुनियाला गांव में पैदल रास्तों के साथ ही अन्य सुधारीकरण कार्य के लिये विभागों से प्रस्ताव मांगे गये हैं। लेकिन वर्तमान तक प्रस्ताव प्राप्त नहीं हो सके हैं। पुनः विभागों को पत्र लिखकर प्रस्ताव मंगवाये जा रहे हैं। जल्द ही गांवों के पैदल मार्ग और अन्य व्यवस्थाएं सुचारु की जाएंगी।

नंद किशोर जोशी, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, चमोली।

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