रोमांच, कोतुहल, सौंदर्य और साहसिक पर्यटन का खजाना : डियारिसेरा बुग्याल

 रोमांच, कोतुहल, सौंदर्य और साहसिक पर्यटन का खजाना : डियारिसेरा बुग्याल
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चमोली: चमोली जिला साहसिक पर्यटन के लिए खजाने से कम नहीं है। लेकिन जानकारी के अभाव में आज भी कई गुमनाम पर्यटक स्थल आज भी पर्यटकों की पहुंच से दूर हैं। ऐसा ही एक पर्यटक स्थल है जोशीमठ ब्लॉक के करछौं गांव के शीर्ष पर स्थित डियारिसेरा। रोमांच, कौतूहल ओर प्राकृति सौंदर्य से लबरेज डियारीसेरा बुग्याल साहसिक पर्यटन के लिए बेहद मुफीद स्थान है।
डियारिसेरा करछौं गांव से 8 किमी की दूरी पर 5 हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। डियारीसेरा बुग्यालों में खिले उच्च हिमालयी फूल जहां आकर्षण का केंद्र हैं। वहीं बुग्याल में स्वतः होने वाले धान और मडुवे की फसल और प्राकृतिक रुप से बनी गूल (नहरें) पर्यटकों के कौतूहल और रोमांच को दोगुना करने वाली है। स्थानीय ग्रामीण इसे धार्मिक मान्यता से जोड़ते हुए यहां होने वाले धान और मंडुवे की खेती वन देवियां (परियां) द्वारा किये जाने की बात कहते हैं। बुग्याल में स्थित हनुमान ताल और भूमियाल मंदिर क्षेत्र में देवताओं की उपस्थित का अहसास करते हैं। डियारिसेरा के पैदल रास्ते से हिमालय की नंदा घुंघुटी, त्रिशूल, नंदा देवी, चौखम्भा, बंदरपुंछू, सप्तकुण्ड पर्वत श्रृखलाओं का दीदार भी अलग अनुभव देता है। महादीप पंवार, भरत सिंह फरस्वाण, विक्रम फरस्वाण और भवान सिंह फरस्वाण के अनुसार यंहा पूर्व में स्वतः मंडुवे के खेत भी थे, जो प्राकृतिक आपदाओं में क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
ऐसे पहुंचे डियारीसेरा बुग्याल—-
बदरीनाथ हाईवे के जोशीमठ पड़ाव से 17 किमी की वाहन से दूरी तय कर करछौं गांव पहुंचा जाता है। यहां से ग्रामीणों की मदद से 8 किमी की पैदल दूरी कर डियारी सेरा बुग्याल पहुंचा जा सकता है। बुग्याल पहुंचने के लिये घाट, बिरही और औली से भी पैदल मार्ग हैं। लेकिन करछौं गांव का रास्ता सुलभ और सुगम है।

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